रुष्ट न हो खुशहाली फैलाती ऐसा मेरा यार।
आज विरह में व्यथित लगा उसका उद्गार।।
प्रेम रिक्त है आखिर कितना भावुक पल में।
गुजर न जाएं नर्क के पल करो जरा उपकार।।
तुम देवी स्वर्ग तुम्हारा जग आश्रित तुम पर।
प्रेम निवेदन अधरों से सेवक करता बार-बार।।
सदाचार के नाते आलिंगन भर के 'उपदेश'।
सम्मोहित कर देने का कार्य करे पालनहार।।
आराधक बनकर देख लिया मन व्याकुल है।
अब सहन नही होता है कितना झेलू दुत्कार।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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