आजकल आमने-सामने नही,
ख्यालो में बात चलती।
खुली आँखों से नही,
बन्द आँखों में मुलाकात चलती।
कभी एहसास बनकर,
तो कभी याद बनकर,
दूर रहकर भी नही दूर 'उपदेश',
पल पल मेरी सांसो मे चलती।
- उपदेश कुमार शाक्यवार 'उपदेश'
गाजियाबाद

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

Show your love with any amount — Keep Likhantu.com free, ad-free, and community-driven.
The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
आजकल आमने-सामने नही,
ख्यालो में बात चलती।
खुली आँखों से नही,
बन्द आँखों में मुलाकात चलती।
कभी एहसास बनकर,
तो कभी याद बनकर,
दूर रहकर भी नही दूर 'उपदेश',
पल पल मेरी सांसो मे चलती।
- उपदेश कुमार शाक्यवार 'उपदेश'
गाजियाबाद
© 2017 - 2026 लिखन्तु डॉट कॉम