दिल में मोहब्बत और आंखें कातिलाना,
ऐसे में अरे ओ साजन! करीब मत आना!
छुओ तो दिल का पुर्जा पुर्जा घायल,
सांसों को ठहरने का नहीं मिलता ठिकाना!
रोम रोम चलतीं है,गरम गरम आंधियां
पलकों पर सजती है, पूरा मयखाना!
कड़क रही बिजलियां,दिल की आसमान में,
गुजारिश है तुमसे, पूरा सावन बरसाना!
तुम्हारी बाहों की,नर्मियां कम न पड़ जाए,
ऐ मेरे साजन! बस, इतना ही बहकाना!!
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







