"एक दीपक एक उदाहरण"
आज एक बात कहने का मन हुआ, बात कोई बड़े ज्ञान को नहीं घेरती है लेकिन मुझे उस पर में ले गई कि किसी को महत्व देने तरीके में बदलाव आ गया,
आज जब शाम की आरती करने लगा, दीपक जलाने लगा तब देखा,
क्या देखा, बहुत कुछ,
देखा कि उस दीपक में बहुत संख्याबल था,
जैसे दीपक, तेल या घी, बाती, घी का बाती में रम जाना, माचिस और उसकी लौ, बाती को डुबोना, उसके एक कोर को या एक हिस्से को जलाने के लिए आगे करना, दीपक जलाना, दीपक का जलना, दीपक जलाने वाला मैं, पूजा स्थल, पूजा का समय, शाम का वक्त, सूरज डूबना, जलती हुई बाती का दुआ, उसका प्रकाश, उसे रखने का स्थान, एक तय समय तक जलना, और बुझ जाना फिर से धुआं, कालापन, राख। मतलब इतना कुछ और एक भी ना तो दीपक का ही महत्व नहीं, दीपक ही नहीं।
मुझे इससे क्या मिला, यानि महत्व यानि संसार में जो कुछ है, जो प्राणी है , जो भी इंसान हैं उन सबका महत्व है, हमें हमारे बनाए नियमों से, किसी एक सफलता से या कर्म या संस्कार या जो भी तरीके से महत्व या व्यवहार करते हैं वो उसके अस्तित्व को चोट पहुंचाता है, सब अपना एक अस्तित्व रखते और किसी को हमारे द्वारा लिए गए चरित्र प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं है, वो स्वयं अपने महत्व के कारण उपस्थित है, किसी को जिंदगी मिलना ही इस बात का प्रमाण है कि वो चरितार्थ है महत्वपूर्ण है।।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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