स्वयं को देखने की,
ललक तुम्हारी देख
लगता है आइने में,
खुद ही चला जाऊं
सात फेरे मेरे संग,
याद करो सजनी
कौन सा वचन तुम्हें
याद मैं कराता जाऊं
क्या नसीब पाया है,
घर का ये आइना
छोटी मेरी किस्मत
मैं किसे किसे बताऊं
सारा दिन आइने से
बात करती हो तुम
अपनी ब्यथा को मैं
किस किसको सुनाऊं।।
अपनी स्वरूप को
बना लो आइने के जैसा
रंग रूप अपना मैं
तुझमें निहारे जाऊं।।
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







