आग सी जलने लगी है
चल रही हैं लू जमीं पर , आग सी जलने लगी है
जल रही चारों दिशाएं अब जिन्दगी थमने लगी है
कह दो इन बादलों से दो बूंद पानी की गिरा दें
शुष्क, मौसम हो गया है, यह धरा जलने लगी है
पक्षियों के घौंसलों में अब हो गया है डेरा तपिश का
छा गई है अब हवा में, एक अजब सी सनसनी है
राहें ये सारी धरा की, अब हो गई हैं सुनसान सारी
बढ़ गया संताप मन में ये ख्वाहिशें भी अनमनी हैं
घर में भी चारों तरफ, गजब का एक माहौल है
शैतानियां बच्चों की घर में रोज अब बढ़ने लगी हैं
बीमारियां बेखौफ होकर कर रही हैं तांडव यहां पर
अस्पतालों में लम्बी कतारें रोज अब लगने लगी हैं
जब जल रही है ये धरा तब ख्याल कर अपना यादव
कुछ करो मिलके जतन क्यूं ये धरा जलने लगी है
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







