इंसान की जरूरते बदलती रहती।
उसके असर से बाते बदलती रहती।।
दर्द बोये है तो खुशी कैसे हासिल हो।
खुशी की सीमा भी बदलती रहती।।
उम्र के साथ-साथ बर्दाश्त भी करती।
बर्दाश्त की 'उपदेश' हद बदलती रहती।।
- उपदेश कुमार शाक्यवार 'उपदेश'
गाजियाबाद

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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इंसान की जरूरते बदलती रहती।
उसके असर से बाते बदलती रहती।।
दर्द बोये है तो खुशी कैसे हासिल हो।
खुशी की सीमा भी बदलती रहती।।
उम्र के साथ-साथ बर्दाश्त भी करती।
बर्दाश्त की 'उपदेश' हद बदलती रहती।।
- उपदेश कुमार शाक्यवार 'उपदेश'
गाजियाबाद
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