एक तो ख्वाब दूसरी मैं आदत से बेताब।
प्यार समझ न पाई मगर रहा लाजवाब।।
प्यार की समझ आने से पहले का प्यार।
बुलबुले जैसे बनाता तरह-तरह के ख्वाब।।
एक गहराई में चाहत जैसे ही डूब जाती।
हल्के स्पर्श के भान से ही बहता शबाब।।
एक सहता दूजा संग होने का सुख लेता।
मन के गुप्त धागों में ज्यों बढ़ता खिंचाव।।
निढाल होकर लेटते 'उपदेश' उस वक्त।
आनन्दित प्रेम चरम पर पहुँचता जनाब।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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