मै काफी डरा
फिर भी आगे बढ़ा
लेके तिरंगा l
मै नहीं डरू
भारत मेरी मातृ
फिरंगी कुत्ते l
मै गया भिड़
गोलिंयाँ चली बीस
छलनी देह l
कोई न गम
अब, मेरे वतन
सलाम तुझे l
अर्पित चला
विलग देहपुष्प
तेरे चरण l
✍️ प्रभाकर, मुंबई ✍️

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
मै काफी डरा
फिर भी आगे बढ़ा
लेके तिरंगा l
मै नहीं डरू
भारत मेरी मातृ
फिरंगी कुत्ते l
मै गया भिड़
गोलिंयाँ चली बीस
छलनी देह l
कोई न गम
अब, मेरे वतन
सलाम तुझे l
अर्पित चला
विलग देहपुष्प
तेरे चरण l
✍️ प्रभाकर, मुंबई ✍️
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