बह रहा हूँ निर्झर सा,
बिना रुके नदी सा,
हे शिव, मुझे सागर
कर दे।
हे शिव, मुझे ठहराव दे,
लहरें रहने दे,
मगर मुझे स्थिरता दे।
मेरे अंतस को गहराई दे,
लहरों की उच्छृंखलता
झूमती रहे ऊपर-ऊपर,
भीतर सागर-सा गहरा कर दे।

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
बह रहा हूँ निर्झर सा,
बिना रुके नदी सा,
हे शिव, मुझे सागर
कर दे।
हे शिव, मुझे ठहराव दे,
लहरें रहने दे,
मगर मुझे स्थिरता दे।
मेरे अंतस को गहराई दे,
लहरों की उच्छृंखलता
झूमती रहे ऊपर-ऊपर,
भीतर सागर-सा गहरा कर दे।
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