पहले तत्व -
भूमि तत्व, जल तत्व,
अग्नि तत्व, वायु तत्व, आकाश तत्व।
फिर तत्वों से बनी -
पंच तत्व की प्रियसी, ये मनुज देह।
देह में जागे -
भाव अचरज, शब्द अचरज,
प्रेम अचरज, एकांत अचरज, समूह अचरज,
संगीत अचरज, कला अचरज।
अचरज से बने चक्र -
मन चक्र, विचार चक्र, चेतना चक्र,
स्वप्न चक्र, नींद चक्र, जागृति चक्र।
चक्रों से बना जीवन -
जन्म चक्र, जीवन चक्र, कर्म चक्र,
विचरण चक्र, प्रकाश चक्र।
जीवन के पार -
काल अचरज, विश्व अचरज, आत्म अचरज,
मृत अचरज, शून्य अचरज।
शून्य के भी पार -
ईश्वर चक्र, मोक्ष चक्र,
अनादि अनंत अनाथ अथाह सफर।
और इस पूरे क्रम में -
मिट्टी, राख, तिनका, धूल,
देह अधूरी, भीतर कुछ नहीं,
हँसी जो पाने-खोने में लगी रही।
देह से छुटा, कहाँ को गया
क्यों गया, कैसे गया,
ना हम जान पाएं,
जानने की ख्वाहिश में,
जन जन की जान चली जाए,
अभी होश है,
आगे नहीं ख़बर ,
कितना जागे,
बस खुद को बचाएं,
इस दहलीज से बाहर जाने से,
जाने वाले भी गए,
अब उनके अज्ञेय कदम यहीं रह गए।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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