नहीं चाहिए - यौवन जीवन,
लौटा दो, मेरा बचकाना,
नहीं चाहिए - अरबों खरबों,
देदो मुझको, बस आठाना।
-अशोक कुमार पचौरी
(जिला एवं शहर अलीगढ से)
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
सर्वाधिकार अधीन है

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

Show your love with any amount — Keep Likhantu.com free, ad-free, and community-driven.
The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
नहीं चाहिए - यौवन जीवन,
लौटा दो, मेरा बचकाना,
नहीं चाहिए - अरबों खरबों,
देदो मुझको, बस आठाना।
-अशोक कुमार पचौरी
(जिला एवं शहर अलीगढ से)
© 2017 - 2026 लिखन्तु डॉट कॉम