सवालों की तरह
ढ़ल गई शाम रातों में, सवालों की तरह
सोचते ही रह गए हम ख्यालों की तरह
यूं तो रौशन है ये जिन्दगी कई रंगों से
मगर उङ गए यह रंग उजालों की तरह
मोहब्बत का ये अंजाम जब देखा हमने
यह दिल टूटा हुआ था प्यालों की तरह
मर्ज, दिल का बढ़ा, जब दवा की हमने
सुलगता रहा यह दिल सवालों की तरह
अगर ऐसे ही करेंगे, वो मोहब्बत हमसे
जल उठेंगे ये जज्बात मशालों की तरह
प्यार किया तुम से तो कहें बेवफा कैसे
खो रहा यह यकीं अब सवालों की तरह
जिस तरह से ये इश्क हो रहा है यादव
हम, भटकते ही रहेंगे, ग्वालों की तरह
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







