"स्त्री : सृजन से संघर्ष तक"
स्त्री, तू सृजन की प्रतीक है,
जन्म देती है जीवन को, हर क्षण।
पर संघर्ष भी तेरा कम नहीं,
हर कदम पर चुनौतियों का सामना करती है तू।
तू माँ है, तू पत्नी है,
तू बेटी है, तू बहन है।
हर रूप में तू प्यारी है,
पर संघर्ष तेरा जारी है।
तू सृजन करती है, पर तेरा सृजन,
कभी-कभी तेरा संघर्ष बन जाता है।
पर तू हार नहीं मानती,
तू आगे बढ़ती है, हर बार।
तू अपने आँसुओं को छुपाती है,
तू अपने दर्द को दबाती है।
पर तू मजबूत बनी रहती है,
तू अपने सपनों को पूरा करती है।
तू एक नदी की तरह है,
जो बहती है, कभी नहीं रुकती।
तू एक पहाड़ की तरह है,
जो खड़ा है, कभी नहीं झुकता।
तू अपने परिवार के लिए जीती है,
तू अपने समाज के लिए लड़ती है।
तू अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाती है,
तू अपने सपनों के लिए जीती है।
तू एक प्रेरणा है, तू एक शक्ति है,
तू ही है, जो इस दुनिया को बदल सकती है।
तू एक माँ है, तू एक शिक्षक है,
तू एक नेता है, तू एक कलाकार है।
तू अपने जीवन को सजाती है,
तू अपने भविष्य को बनाती है।
तू अपने भाग्य को लिखती है,
तू अपने जीवन को जीती है।
तू अपने दिल की आवाज सुन,
तू अपने सपनों को पूरा कर।
तू अपने जीवन को प्यार से जी,
तू अपने जीवन को सार्थक बना।
तू एक फूल की तरह है,
जो खुशबू फैलाती है, हर जगह।
तू एक तारा की तरह है,
जो रोशनी देती है, हर अंधेरे में।
तू अपने जीवन को जी,
तू अपने सपनों को पूरा कर।
तू अपने जीवन को सार्थक बनाकर,
तू अपने जीवन को जी।
तू अपने भविष्य को रोशन कर,
तू अपने सपनों को पूरा कर।
तू अपने जीवन को सार्थक बनाकर,
तू अपने जीवन को एक नए उड़ान पर ले जा।
तू अपने आप को मजबूत बना,
तू अपने जीवन को एक नए स्तर पर ले जा।
तू अपने सपनों को पूरा कर,
तू अपने जीवन को एक नए भविष्य की ओर ले जा।
तू अपने जीवन को एक कविता बना,
तू अपने सपनों को एक गीत बना।
तू अपने जीवन को एक नृत्य बना
, तू अपने जीवन को एक नए रंग में रंग दे।
रचनाकार- पल्लवी श्रीवास्तव
ममरखा, अरेराज, पूर्वी चम्पारण (बिहार)


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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