उस तरफ भी कोई रहता है...!
उस तरफ भी कोई रहता है,
कुछ कहता नहीं, बस सुनता है।
एक पर्दा है भी और नहीं भी,
कपास की तरह ज़िंदगी बुनता है।
उस तरफ भी कोई रहता है…......!
हर दौर की उसकी कहानी नहीं है,
कलम उसकी, मन हो तो लिखता है।
इस तरफ एक रंगमंच सजा है बस,
उस तरफ के इशारे पर पर्दा गिरता है।
उस तरफ भी कोई रहता है….....!
शोरगुल में भी वो उस तरफ शांत है,
इस बाज़ार में उसका सिक्का चलता है।
वो मौन है, उस तरफ बात नहीं करता,
बुनता है, उधेड़ता है ,फिर-फिर बुनता है।
उस तरफ भी कोई रहता है…........!
कौन है उस पार , कोई लौटकर नहीं आया,
बाहरी कदमों के लिए भीतर रास्ता चुनता है।
इस पार और उस पार के क्षितिजों पर भी,
वो हर बार नया एक क्षितिज बुनता है।
उस तरफ भी कोई रहता है…............!
आभास है, विश्वास है ,मन कहता है,
उस तरफ भी कोई रहता है, चुप रहता है।
चुप रहकर भी जाने कैसे सब कुछ कहता है
उस तरफ भी कोई रहता है…...............!
और शायद उसी की ख़ामोशी में
हम सबकी आवाज़ छुपा कर रखता है…....!
मानसिंह सुथार ©️®️


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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