उसका एक सपना है,
एक काम,
जो उसका अपना है,
खड़ा है हर कोई,
उसके इस सपने के बीच,
कौन गैर, कौन अपना है?
सुबह से शाम तक
हर पल भटकना है,
सबको खुश रखना है,
एक सपने को पूरा करने में
उसे कितना मरना है।
हर बर्तन घर का,
हर पेट घर का,
हर कपड़ा घर का
उसके भरोसे बैठा है,
छोड़ दे वो काम अपना,
घर में सबका यही सपना है।
मगर उसका अपना काम,
उसका सपना ,
किसी अपने का
कहाँ ऐसा सपना है,
एक माँ है,
यह उसने स्वीकारा है,
एक पत्नी है,
यह उसने स्वीकारा है,
एक वधू है घर की,
यह उसने स्वीकारा है?
मगर उसका एक सपना है,
उसे किसने स्वीकारा है?
सबको देकर आलम्बन,
खड़ी है वह,
अपने स्व को अकेले थामे,
खड़ी है वह।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







