(बाल कविता)
अगर चाहिए रोटी तीस
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गेहूँ की रोटी थीं चार ।
थोड़ा सा बन गया अचार ।।
बेसन की रोटी थीं सात ।
चटनी की तीखी सौगात ।।
मक्के की रोटी थीं तीन ।
ललचा कर रह गया नवीन ।।
पाँच बनाई रोटी नान ।
ख़ाएँगे जिसको मेहमान।।
नौ रोटी जौ की बेदाग ।
अभी लगाओ जरा दिमाग ।।
अगर चाहिए रोटी तीस ।
कितने और बनाएँ पीस ।।
उठ कर बोला तभी विवेक ।
रोटी सेंको केवल एक ।।
राजू बोला गलत जवाब ।
दो रोटी कम, सुनो जनाब।।
और बताऊँ सुन लो राज।
पाँच तरह का बना अनाज ।
भूख लगी माँ दे दो नान।
खा लूँ रोटी आए जान।।
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~ राम नरेश 'उज्ज्वल'


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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