रामाराव घबरा होकर उससे पूछा "क्या हुआ बेटा तुम ठीक तो है न ? " ।सुमन ने आंखों की आंसू रोक न पाया । सुमन ने अपने आप को संभाल कर फोन करने की बात पूछी ।रामा राव ऐसे जवाब दिया कि " तीन दिनों में तुम्हारा शादी होने वाला है जल्दी आजा,भूल गया है क्या ? "
रामाराव को संदेश आकर सुमन से पूछा तुम ठीक तो है न वहाँ ?सुमन ने हाँ कहकर काम के नाम पर फोन बंद कर दिया ।सुमन ने अपने आप पर लांछन लगा दी "क्या कर दिया मैंने,मैंने तो पैसे कमाने की लालची में पड़कर अपने जिंदगी बरबाद कर दिया " ।
थोड़ी देर के बाद सुमन चाबी लेकर बाहर गये। सुमन ने फफक - फफक कर रोने लगा ।एक तरफ से बचपन की खुशियाँ याद आने लगी ।एक क्षण सारे जिंदगी सामने आ गये। यह सब सोचते सोचते उसकी दुर्घटना हुई । उसी दुर्घटना में सुमन का देहांत हो गया ।
यह खबर सुनकर उसके मां-बाप की आंखें नम गए । दोनों ने बिलखने लगी ।शादी रुक गई ।चारों ओर अशांत फैल गई । कर्ज अपने मां-बाप चुकाना पड़ा । अपना सब कुछ भेज कर थोड़ा कर्ज चुकाया । आखिर दोनों अनाथ हो गये है । उन दोनों के मन मन भर भारी होने लगे । शेष कर्ज चुका न पाने की वजह से उन दोनों गुलामी होना पड़ा ।
The end


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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