"पल्लवी की सहज मुस्कान"
हर हाल में हंसने की कला मुझे आती है,
मुस्कुराहट मेरी हर गम को मिटाती है।
ज़िंदगी चाहे जितनी भी परीक्षा ले ले,
मेरी खामोशी भी संग इसके गुनगुनाती है।
न कांटों की चुभन का कोई मलाल रखा,
हर लम्हे को जी कर दिल को संभाल रखा।
चाहें तूफान आएं या राहों में अंधेरा हो,
होंठों पर खुशियों का ही चिराग जला रखा।
हंसना मेरी ताकत है, मुस्कुराना मेरा गहना,
दुखों के समंदर में भी बहते पानी सा बहना।
सिखा दिया है दिल ने मुझे यह हुनर मुस्कुराने का,
कि हर परिस्थिति में बस बेफिक्र होकर ही रहना।
मुस्कुराकर देखना ही ज़माने का नजरिया बदल देता है,
यह वह जादू है जो पत्थरों का दिल भी पिघला देता है।
सिखाया है वक्त ने कि रोने से कुछ हासिल नहीं होता,
एक छोटा सा मुस्कान ही बिगड़ी बात बना देता है।
ना कल की कोई फिक्र है, ना बीते कल का मलाल,
आज के हर पल में जीना ही है मेरा ख्याल।
दुनिया ढूंढती रह जाती है वजह मुस्कुराने की,
और मैं बेवजह ही खुश रहकर दे देती हूँ मिसाल।
रोशनी बनकर छा जाना मेरी पुरानी फितरत है,
उदासी के पन्नों पर खुशियाँ लिखना मेरी आदत है।
जब तक रहेगी साँसें, यह सिलसिला यूँ ही चलेगा,
हर हाल में मुस्कुराना ही मेरे जीने की इबादत है।
रचनाकार- पल्लवी श्रीवास्तव
ममरखा, अरेराज, पूर्वी चम्पारण (बिहार)


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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