Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas MishraThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

नीम करौली बाबा का जीवन और उनके जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण लाइफ लेसन्स

Blog- नीम करौली बाबा का जीवन और उनके जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण लाइफ लेसन्स

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जब इंसान मानसिक तनाव, चिंता और दिशाहीनता से घिर जाता है, तब उसे एक ऐसे मार्गदर्शक की जरूरत होती है जो उसे सादगी और शांति का रास्ता दिखा सके। 20वीं सदी के महान संतों में शुमार नीम करौली बाबा (जिन्हें भक्त प्यार से 'महाराज जी' कहते हैं) एक ऐसे ही दिव्य प्रकाशपुंज हैं। बाबा के अनुयायी सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में फैले हैं। टेक दिग्गज स्टीव जॉब्स (एप्पल के संस्थापक), मार्क जुकरबर्ग (फेसबुक के संस्थापक) से लेकर हॉलीवुड अभिनेत्री जूलिया रॉबर्ट्स जैसी हस्तियां उनके आश्रम कैंची धाम आकर शांति और प्रेरणा पा चुकी हैं।

आइए, इस ब्लॉग में बाबा नीम करौली जी के चमत्कारी जीवन सफर को करीब से जानते हैं और यह समझते हैं कि उनके जीवन के हर पड़ाव से हम अपने दैनिक जीवन के लिए क्या सीख सकते हैं।

प्रारंभिक जीवन: लक्ष्मी नारायण शर्मा से बाबा बनने का सफर

नीम करौली बाबा का जन्म लगभग 1900 के आसपास उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के अकबरपुर गांव में एक समृद्ध ब्राह्मण परिवार में हुआ था। बचपन में उनका नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा था। बहुत ही कम उम्र में उनकी शादी कर दी गई थी, लेकिन उनका मन सांसारिक सुखों में नहीं बल्कि ईश्वर की भक्ति में रमता था।

वे अल्पायु में ही घर छोड़कर सन्यासी बन गए और पूरे भारत में एक साधु के रूप में घूमने लगे। कठोर तपस्या और साधना के बाद उनके भीतर दैवीय शक्तियों का संचार हुआ। वे भगवान हनुमान के परम भक्त थे और कई लोग उन्हें हनुमान जी का साक्षात अवतार भी मानते हैं।

जीवन का सबक (Life Lesson): अपनी अंतरात्मा की आवाज को सुनें

बाबा का शुरुआती जीवन हमें सिखाता है कि भौतिक सुख-सुविधाएं आपको कुछ समय के लिए आकर्षित कर सकती हैं, लेकिन असली मानसिक शांति और जीवन का उद्देश्य आपकी अंतरात्मा की आवाज को पहचानने से ही मिलता है। अपने जीवन के लक्ष्यों के प्रति हमेशा स्पष्ट रहें।

. वह चमत्कारी घटना जिससे नाम पड़ा 'नीम करौली'

बाबा के जीवन से जुड़ा एक बेहद प्रसिद्ध किस्सा है, जिसके बाद उन्हें 'नीम करौली बाबा' का नाम मिला। एक बार बाबा बिना टिकट के एक ट्रेन में सवार हो गए। जब टिकट कलेक्टर (TC) ने उन्हें देखा, तो बहस हुई और बाबा को फारुखाबाद जिले के एक छोटे से स्टेशन 'नीम करौली' पर ट्रेन से नीचे उतार दिया गया।

बाबा बिना किसी गुस्से के चुपचाप अपनी धूनी रमाकर बैठ गए। इसके बाद जो हुआ, उसने सबको हैरान कर दिया। ट्रेन के ड्राइवर ने इंजन चालू किया, लेकिन ट्रेन एक इंच भी आगे नहीं बढ़ी। तकनीकी रूप से ट्रेन में कोई खराबी नहीं थी, फिर भी वह टस से मस नहीं हुई। अंत में, एक स्थानीय अधिकारी ने सुझाव दिया कि उस साधु को वापस ट्रेन में बिठाया जाए।

बाबा ने दो शर्तों पर ट्रेन में बैठना स्वीकार किया: पहली, उस गांव के लोगों के लिए वहां एक पक्का रेलवे स्टेशन बनाया जाए, और दूसरी, रेलवे कर्मचारी आगे से साधुओं और गरीबों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करेंगे। बाबा के ट्रेन में बैठते ही ट्रेन तुरंत चल पड़ी। बाद में वहां स्टेशन भी बना और बाबा का नाम हमेशा के लिए 'नीम करौली बाबा' पड़ गया।

जीवन का सबक (Life Lesson): शांत रहकर भी क्रांति की जा सकती है

जब बाबा को ट्रेन से उतारा गया, तो वे न तो चिल्लाए और न ही उन्होंने कोई विवाद किया। वे शांत रहे। यह घटना हमें सिखाती है कि विपरीत परिस्थितियों में भी अपना आपा नहीं खोना चाहिए। मौन और धैर्य में सबसे बड़ी शक्ति होती है। साथ ही, अपनी शक्ति का उपयोग हमेशा समाज के कल्याण और कमजोरों के अधिकारों के लिए करना चाहिए।

कैंची धाम की स्थापना और वैश्विक प्रभाव

नीम करौली बाबा ने अपने जीवनकाल में कई आश्रम और लगभग 108 हनुमान मंदिरों का निर्माण करवाया। इनमें सबसे प्रमुख है उत्तराखंड के नैनीताल के पास स्थित कैंची धाम। 1960 के दशक में स्थापित यह आश्रम आज दुनिया भर के आध्यात्मिक साधकों का केंद्र है। हर साल 15 जून को यहाँ भव्य भंडारा होता है, जहाँ लाखों लोग प्रसाद ग्रहण करते हैं।

बाबा का दर्शन बहुत सीधा और सरल था। वे किसी पारंपरिक गुरु की तरह बड़ी-बड़ी भाषा में उपदेश नहीं देते थे। उनका मूल मंत्र था: "सब एक" (All is One)। वे अक्सर अपने भक्तों से कहते थे— "सबको प्यार करो, सबकी सेवा करो, भगवान को याद करो और हमेशा सच बोलो।"

जीवन का सबक (Life Lesson): सरलता ही सबसे बड़ा शृंगार है

इतने महान चमत्कार करने और दुनिया के बड़े-बड़े दिग्गजों के गुरु होने के बावजूद बाबा हमेशा एक साधारण कंबल ओढ़कर जमीन पर बैठते थे। वे खुद को कभी भगवान नहीं कहते थे। आज के दौर में जब लोग थोड़े से पैसे या शोहरत पाकर अहंकारी हो जाते हैं, बाबा का जीवन हमें सिखाता है कि आप जितने ऊंचे पद पर पहुंचें, उतने ही जमीन से जुड़े और विनम्र बने रहें।

Writer.Neetu nagar




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