मेरी नज़रों का कोई इलाज़ नहीं है,
तुम्हें देखूँ तो अपनी नज़रों का एहसास नहीं है,
मेरी नज़रों का कोई इलाज़ नहीं है,
बाँधकर रखता हूं तुमको अपनी नज़रों के लिए,
कहीं खो ना जाओ तुम इन नज़रों से बचने के लिए,
मेरी नज़रों का कोई इलाज़ नहीं है,
साँसें लेती है नज़रे तुम्हारे दीदार के लिए,
इन नज़रों से देखने का कोई हिसाब नहीं है।।
अभी आ जाओ,
ये आँखें खाली है,
आके इनको भर दो,
तो जरा इनको भी दिखे,
इन्हीं में जो आँसू है,
उनकी पीड़ा को हर लो,
अभी आ जाओ,
तुम्हारे लायक ये नज़रे मिली है।।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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