सहजता का बरसना
डॉ.एच सी विपिन कुमार जैन "विख्यात"
जो शोर मचाते हैं अक्सर, वो कुछ कर नहीं पाते,
गर्जना करने वाले बादल, सूखी धरती नहीं बुझाते।
पुष्प खिलते हैं तो बस बूंदों की उस छुअन से,
जो चुपचाप बरसती हैं, अम्बर के पावन मन से।
लहजे में अगर कड़वाहट की गर्जना होगी,
तो बात बनते-बनते भी अधूरी रह जाएगी।
शांत होकर जो प्रेम की वर्षा बन कर बरसेगा,
उसी के आँगन में खुशियों की कली खिल पाएगी।
ताकत चिल्लाने में नहीं, बात के असर में रखो,
हवाओं की तरह नहीं, पानी के सफर में रखो।
सृजन हमेशा खामोशी की कोख से जनमता है,
और विनाश तो बस शोर की राहों पर चलता है।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







