9 मई 1540 को कुम्भलगढ़ में जन्मे महाराणा प्रताप प्रताप अपनी वीरता, स्वतंत्रता, प्रेम और संघर्ष के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्होंने 25 से अधिक वर्षों तक मुगलों के खिलाफ छापामार युद्ध (गुरिल्ला युद्ध) जारी रखा।
महाराणा प्रताप के बारे में मुख्य विवरण:-
जन्म:-9 मई, 1540 (कुंभलगढ़ दुर्ग)।
माता-पिता:-पिता महाराणा उदयसिंह ll और माता रानी जयवंताबाई।
बचपन का नाम:-कीका।
राज्याभिषेक:-28 फरवरी 1572 (गोगुंदा)।
मुख्य युद्ध:- हल्दीघाटी का युद्ध (18 जून 1576)।
घोड़ा:- चेतक, जो अपनी वफादारी और बहादुरी के लिए जाना जाता है।
राजधानी:-चावंड (हल्दीघाटी युद्ध के बाद)।
मृत्यु:-19 जनवरी 1597 चावंड में धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाते समय हुई दुर्घटना के कारण उनका निधन हुआ।
महाराणा प्रताप का प्रथम राज्याभिषेक मेंं 28 फरवरी, 1572 में गोगुन्दा में हुआ था, लेकिन विधि विधानस्वरूप राणा प्रताप का द्वितीय राज्याभिषेक 1572 ई. में ही कुुंभलगढ़़ दुुर्ग में हुआ, दुसरे राज्याभिषेक में जोधपुर का राठौड़ शासक राव चन्द्रसेेन भी उपस्थित थे।
महाराणा प्रताप एक राजपूत योद्धा और शासक थे, जिन्होंने 16वीं शताब्दी में मुगल सम्राट अकबर की अधीनता स्वीकार करने से इनकार कर दिया था।
मुगल सम्राट अकबर बिना युद्ध के प्रताप को अपने अधीन लाना चाहता था इसलिए अकबर ने प्रताप को समझाने के लिए चार राजदूत नियुक्त कर भेजे जिसमें सर्वप्रथम सितम्बर 1572 ई. में जलाल खाँ फिर मानसिंह 1573 ई. में , भगवानदास सितम्बर, 1573 ई. में तथा राजा टोडरमल दिसम्बर,1573 ई. में प्रताप को समझाने के लिए पहुँचे, लेकिन असफल रहे।
इस तरह राणा प्रताप ने मुगलों की अधीनता स्वीकार करने से मना कर दिया जिसके परिणामस्वरूप हल्दी घाटी का ऐतिहासिक युद्ध हुआ।
हल्दीघाटी का युद्ध 18 जून 1576 ई. में मेवाड़ तथा मुगलों के मध्य हुआ था। इस युद्ध में मेवाड़ की सेना का नेतृत्व महाराणा प्रताप ने किया था।
इस युद्ध में महाराणा प्रताप की तरफ से लड़ने वाले एकमात्र मुस्लिम सरदार थे- हकीम खां सूरी।
युद्ध में जब महाराणा प्रताप जख्मी हो गए तो बींदा के झालामान ने राज चिन्ह धारण कर राणा प्रताप की जगह ली और अपने प्राणों का बलिदान करके महाराणा प्रताप के जीवन की रक्षा की।
माना जाए तो इस युद्ध में न तो अकबर पूरी तरह जीता और न ही राणा हारे।
इस युद्ध में कोई विजय नहीं हुआ लेकिन देखा जाए तो इस युद्ध में महाराणा प्रताप सिंह की विजय हुई।
Article by
Admin - Reena Kumari Prajapat 


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







