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Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

🙏माँ-बाप का भईया सम्मान कर लो।🙏।

  • शीर्षक*
    🙏✍️🙏माँ-बाप का भईया सम्मान कर लो।
    जिन्होंने तुमको जन्म दिया उनका एहसान कर लो।।🙏✍️🙏🏆🪔🚩🇮🇳🫡🧑‍🔬🥰

    माँ-बाप जीवन में एक ही बार मिलते हैं ,
    ये परम पूज्य भगवान जी होते हैं ।
    ऐसा भी तुम ,
    यह ज्ञान जान लो ।।
    माँ-बाप का भईया सम्मान.................।।

    औलाद के खातिर माँ-बाप ना जानें क्या-क्या कर जातें हैं ,
    फिर भी औलादें ही माँ-बाप गरियाती हैं ।
    यह भी कलयुग का ही , खेल तमाशा जान लो ।।
    माँ-बाप का भईया सम्मान.................।।

    आजकल की औलादों के लिए माँ-बाप भारूँ हो जाते हैं , और औलादें ही अपनी-अपनी बीवियों के तलवे धो-धो चाटते हैं ।यह भी घोर कलयुग का ही , प्रचण्ड-प्रकोप रूप देख लो।।
    माँ-बाप का भईया सम्मान.................।।

    आजकल की औलादों के पास इतना समय ही नहीं , की दो शब्द प्रेम के माँ-बाप से बोलले ही सही । यही आधुनिक कलयुगी , समय का ज्ञान रूप देख-जान लो।।
    माँ-बाप का भईया सम्मान.................।।

    माँ-बाप अपनी औलादों के लिए खुद के ख्वाबों को दमन कर जाते हैं , फिर भी
    औलादें ही कहती हैं कि माँ-बाप मतलबी होते हैं । यही मतलबी युग की , पहचान का ज्ञान रूप देख-जान लो ।।
    माँ-बाप का भईया सम्मान.................।।

    अगर औलाद को चोट लगती है , माँ-बाप की आत्मा रोने लगती है ।
    यह भी इसी कलयुग में ही , माँ-बाप की आत्मा का प्रेम-रूपी ज्ञान देख-जान लो।।
    माँ-बाप का भईया सम्मान.................।।

    माँ-बाप से बढ़कर दुनिया में और कोई शुभचिंतक नहीं होता है , फिर भी औलादों को माँ-बाप का कहना दुश्मनों की तरह लगता है । यह भी इसी कलयुगी , औलादों का प्रेम रूपी ज्ञान जान लो ।।
    माँ-बाप का भईया सम्मान.................।।

    मेरे कहने के अनुसार मैं फिर कहता हूँ , कि मैं अपने माँ-बाप के लिए दुनिया से लड़ सकता हूँ । ऐसी ही आत्म रूपी , आन बान शान तुम भी ठान लो ।।
    माँ-बाप का भईया सम्मान.................।।

    इसलिए मैं कहता हूँ मेरे भाइयों रें भाइयों ,
    मात-पिता की आँखों में कभी आँसू ना
    आने देईयों । ऐसा ही तुम भी , इसी कलयुग में ही आत्म-प्राण ठान लो।।
    माँ-बाप का भईया सम्मान.................।।

    मैं फिर बार-बार आपसे हाथ जोड़कर कहता हूँ - कि मात-पिता की करऊँ तुम सेवा , लियो है मनुष्य जीवन जो दुर्लभ है देवा दी देवा । ऐसा भी तुम , इसी कलयुग का ही ज्ञान देख-जान लो ।।
    का भईया सम्मान.................।।

    कलयुग केवल नाम अधारा , सुमिरि सुमिरि नर उतरही पारा वही मार्ग का ज्ञान देख-जान लो । माँ-बाप की भईया सेवा कर-लो,
    बिन चारों-धाम के भवसागर तर-लो ।।

    माँ-बाप का भईया सम्मान कर लो।
    जिन्होंने तुमको जन्म दिया उनका एहसान कर लो।।

    (मेरा आत्म-परिचय🙏✍️🙏)
    नाम : बाल कवि बाल वैज्ञानिक ठाकुर अभय प्रताप सिंह।
    कक्षा : 10th वर्ग B2।
    विद्यालय : बख्शी का तालाब इण्टर कॉलेज लखनऊ उत्तर प्रदेश भारत।
    माता-पिता : श्रीमती लक्ष्मी सिंह श्री अमित सिंह।
    भाई-बहन राजा सिंह परी सिंह।
    गाइड-अध्यापक : श्री उमेश कुमार निराला सर जी/श्री प्रवीण कुमार राय सर जी/श्री हरिश्चंद्र सिंह चौहान सर जी
    पता : सुहेलिया मजरे सुहेला पोस्ट बकाहुवाँ बाजार थाना सदरपुर विकास-खण्ड महमूदाबाद जिला सीतापुर राज्य उत्तर प्रदेश देश भारत ग्रह पृथ्वी ।
    मो०नं०8429372188/tapssarkar2008@gmail.com (मेरा प्रसिद्ध नाम बाल कवि बाल वैज्ञानिक T.A.P.S. Sarkar )



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