कुछ लोग दोस्त बन के डसेंगे ll
सामने कुछ और पीठ पीछे ,
कुछ और बताएंगे ll
छलावा करके खुद पीठ में खंजर मारजाएगे ll
जब पकड़ी जाएगी ,
उसकी गद्दारी तो अपनेपन का ढोंग रचाएंगे ll
जब होने लगेगी उसकी बदनामी ,
तो खुद को सच्चा और तुम्हें झूठा बताएंगे ll
छुपा कर अपनी गद्दारी मैफिल में ,
अपनापन का ढोंग रचाएगा ll
देख के तेरी तरक्की खुद जलते रह जाएगा ll
लोगों को वो तुझे अपना भाई बतलाएगा,
फिर वही खंजर पीठ में मर जाएगा
कुछ लोग दोस्त बन के तुझको ही ,
बदनाम करने तेरी मैफिल में आएगा ll
मै सबको अपना मानता हूँ,ऐसे दिखवा करके,
तेरे पीठ पीछे तुझे ही खंजर मार जायेगे ll
दोस्त बन के कुछ गद्दार दोस्ती को,
बदनाम करने हमारे मैफिल में भी आएगा ll
देख तेरी तरक्की वो घुट घुट के मार जाएगा ll
तेरी बर्बादी के राह में वो अपना भी जाल बिछाएंगे ll
तू फंस गया उसके जाल में,
तो मारने वो इंसान आयेगा ll
दिखवा करके वो तुझे खंजर मर जाएगा ll
देख कर उसकी गद्दारी को ,
तेरे आँख छलकते रह जाएगा ll
दर्द भर एहसास होगा,
कोई न तेरे साथ होगा ll
फिर जाके वर्षों का रिश्ता,
तू मिनटों में तोड़ आयेगा ll
छलावा और दिखवा करके,
कुछ लोग दोस्ती के नाम पर,,
तेरा फायदा उठेगा ll
कुछ लोग दोस्त बन के,
तुझको ही बदनाम करने ll
तेरी मैफिल में आयेगा ll
लेखक
शिवम् जी सहाय


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







