🙏माँ-बाप का भईया सम्मान कर लो।🙏।
- शीर्षक*
🙏✍️🙏माँ-बाप का भईया सम्मान कर लो।
जिन्होंने तुमको जन्म दिया उनका एहसान कर लो।।🙏✍️🙏🏆🪔🚩🇮🇳🫡🧑🔬🥰
माँ-बाप जीवन में एक ही बार मिलते हैं ,
ये परम पूज्य भगवान जी होते हैं ।
ऐसा भी तुम ,
यह ज्ञान जान लो ।।
माँ-बाप का भईया सम्मान.................।।
औलाद के खातिर माँ-बाप ना जानें क्या-क्या कर जातें हैं ,
फिर भी औलादें ही माँ-बाप गरियाती हैं ।
यह भी कलयुग का ही , खेल तमाशा जान लो ।।
माँ-बाप का भईया सम्मान.................।।
आजकल की औलादों के लिए माँ-बाप भारूँ हो जाते हैं , और औलादें ही अपनी-अपनी बीवियों के तलवे धो-धो चाटते हैं ।यह भी घोर कलयुग का ही , प्रचण्ड-प्रकोप रूप देख लो।।
माँ-बाप का भईया सम्मान.................।।
आजकल की औलादों के पास इतना समय ही नहीं , की दो शब्द प्रेम के माँ-बाप से बोलले ही सही । यही आधुनिक कलयुगी , समय का ज्ञान रूप देख-जान लो।।
माँ-बाप का भईया सम्मान.................।।
माँ-बाप अपनी औलादों के लिए खुद के ख्वाबों को दमन कर जाते हैं , फिर भी
औलादें ही कहती हैं कि माँ-बाप मतलबी होते हैं । यही मतलबी युग की , पहचान का ज्ञान रूप देख-जान लो ।।
माँ-बाप का भईया सम्मान.................।।
अगर औलाद को चोट लगती है , माँ-बाप की आत्मा रोने लगती है ।
यह भी इसी कलयुग में ही , माँ-बाप की आत्मा का प्रेम-रूपी ज्ञान देख-जान लो।।
माँ-बाप का भईया सम्मान.................।।
माँ-बाप से बढ़कर दुनिया में और कोई शुभचिंतक नहीं होता है , फिर भी औलादों को माँ-बाप का कहना दुश्मनों की तरह लगता है । यह भी इसी कलयुगी , औलादों का प्रेम रूपी ज्ञान जान लो ।।
माँ-बाप का भईया सम्मान.................।।
मेरे कहने के अनुसार मैं फिर कहता हूँ , कि मैं अपने माँ-बाप के लिए दुनिया से लड़ सकता हूँ । ऐसी ही आत्म रूपी , आन बान शान तुम भी ठान लो ।।
माँ-बाप का भईया सम्मान.................।।
इसलिए मैं कहता हूँ मेरे भाइयों रें भाइयों ,
मात-पिता की आँखों में कभी आँसू ना
आने देईयों । ऐसा ही तुम भी , इसी कलयुग में ही आत्म-प्राण ठान लो।।
माँ-बाप का भईया सम्मान.................।।
मैं फिर बार-बार आपसे हाथ जोड़कर कहता हूँ - कि मात-पिता की करऊँ तुम सेवा , लियो है मनुष्य जीवन जो दुर्लभ है देवा दी देवा । ऐसा भी तुम , इसी कलयुग का ही ज्ञान देख-जान लो ।।
का भईया सम्मान.................।।
कलयुग केवल नाम अधारा , सुमिरि सुमिरि नर उतरही पारा वही मार्ग का ज्ञान देख-जान लो । माँ-बाप की भईया सेवा कर-लो,
बिन चारों-धाम के भवसागर तर-लो ।।
माँ-बाप का भईया सम्मान कर लो।
जिन्होंने तुमको जन्म दिया उनका एहसान कर लो।।
(मेरा आत्म-परिचय🙏✍️🙏)
नाम : बाल कवि बाल वैज्ञानिक ठाकुर अभय प्रताप सिंह।
कक्षा : 10th वर्ग B2।
विद्यालय : बख्शी का तालाब इण्टर कॉलेज लखनऊ उत्तर प्रदेश भारत।
माता-पिता : श्रीमती लक्ष्मी सिंह श्री अमित सिंह।
भाई-बहन राजा सिंह परी सिंह।
गाइड-अध्यापक : श्री उमेश कुमार निराला सर जी/श्री प्रवीण कुमार राय सर जी/श्री हरिश्चंद्र सिंह चौहान सर जी
पता : सुहेलिया मजरे सुहेला पोस्ट बकाहुवाँ बाजार थाना सदरपुर विकास-खण्ड महमूदाबाद जिला सीतापुर राज्य उत्तर प्रदेश देश भारत ग्रह पृथ्वी ।
मो०नं०8429372188/tapssarkar2008@gmail.com (मेरा प्रसिद्ध नाम बाल कवि बाल वैज्ञानिक T.A.P.S. Sarkar )
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