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Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

नारी के बिना मनुष्य का कोई अस्तित्व नहीं

।।नारी दिवस।।

।।नारी दिवस।।

भला बताओ बिन नारी का क्या दर्शन संसार हुआ,
नारी ही तो स्वयं शक्ति की धरती में अवतार हुआ।
बाम भाग पर भई समाहित पति बनता भुजचारी है,
नारायण का रूप बनाती बनता तब जगधारी है।।1।।

जिस समाज में नारी का होता ऊँचा स्थान रहा,
बिबुध रमा करते उस भू पर होता तीर्थ समान रहा।
नारी जहां उपेक्षित होती निष्फल होते काज वहाँ,
कुल मर्यादा गई रसातल निर्बल होती लाज जहाँ।।2।।

नारी ही तो सावित्री थीं जो यमराज हरायी थीं,
सत्यवान की आयु जीतकर पुनः उन्हें लौटायी थी।
नारी ही तो मां सीता थीं श्रीराम को सदा अजेय किया,
नारी ही थीं मां अनसुइया तपबल दत्तात्रेय किया।।3।।

नारी वह जो उच्च कर्म से दोनों कुल का नाम करे,
पिता और पति मर्यादा हित दोनों कुल का ध्यान करे।
दोनों कुल के गर्व करें बँधती ऐसी मर्यादा हो,
जो पदचिह्न प्रमाण बनें मानों माधव की राधा हो।।4।।

नारी वह है अपने पति के नित जीवन को सफल किया,
उठे हुए जीवन प्रश्नों को समय समय हल कुशल किया।
तूफानों में फँसी नाव जब स्वयं हाँथ पतवार लिया,
युद्धभूमि में साथ दिखीं रथ चक्र कील का काम किया।।5।।

नारी ही तो दुर्गा थी नारी काली विकराल रहीं,
जीवन के संग्रामभूमि में हर विपदा की ढाल रहीं।
मां बहन बेटियाँ पत्नी पावन नारी का ही रूप रहीं,
खड़ीं मिली इक पाँव छाँव बनि चाहे कितनी धूप रही।।6।।

पन्ना त्याग समर्पण अनुपम नारी का इतिहास रहा,
स्वयं लाज हित पद्मिनियों का जौहर नारी खास रहा।
दत्तक सुत को पीठ बांधकर गोरों को ललकार रहीं,
कंगन चूड़ी त्यागि हाँथ में बरछी ढाल तलवार गहीं।।7।।

कभी चेनम्मा दुर्गा बनकर अंग्रेजों से खूब लड़ीं,
कभी अहिल्या बाई आकर रचतीं हैं इतिहास बड़ी।
कभी कल्पना अंतरिक्ष में विजय पताका फहरातीं,
कभी लता संगीत सप्त स्वर कोकिल कण्ठ सुना जातीं ।।8।।

राजनीति के पायदान से इंदिरा गांधी शिखर चढ़ीं,
प्रथम राष्ट्रपति महिला प्रतिभा का स्वर्णिम इतिहास गढ़ीं।
उमा भारती माया ममता जयललिता सिरमौर रहीं,
नारी ही थीं शक्ति स्वरूपा जो सी एम के तौर रहीं।।9।।

आपरेशन सिन्दूर को दुनिया नजदीकी से देखी है,
जहाँ व्योमिका सिंह गर्जना नारी नभ में पेखी है।
पाकिस्तान के सैन्य ठिकाने और भाँपती खोपिया,
दुश्मन सैन्य परखती क्षण क्षण नारि कुरैशी सोफिया।।10।।

शक्ति स्वरूपा अग्नि पुंज कम ताकत आँकी थी,
लेकिन तब विश्वास हुआ जब छाती फाटी थी।
रोने लगा घाव देखकर मोदी कर दो युद्धविराम,
तुली हुईं विध्वंस पाक का लेती नहीं जरा विश्राम।।11।।

भरा पड़ा इतिहास हमारा नारी भव्य प्रदर्शन,
बिन नारी नर रहा अधूरा क्या कर सकता अर्जन।
नारी नर की शक्तिपुंज है और दाहिनी शून्य रही,
परम प्रतापी पुरूष बनाती वह जीवन की पुण्य रही।।12।।

नारी ही घर रहीं लक्ष्मी नारी घर को स्वर्ग किया,
नारी घर की दिव्य पताका नारी गृह उत्कर्ष किया।
जगत्पिता श्री राम हमारे नाम में सीताराम किया,
लीलाधर श्री कृष्ण नाम में पहले राधेश्याम किया।।13।।

सदा शक्ति जो आगे रखता सारे कारज पूर हुए,
घर कुटुम्ब संपन्न शांति वैभव तब भरपूर हुए।
उस सुशक्ति को आगे रखकर धर्मध्वजा फहराया है।
नारी कारण दशों दिशायें गौरव मेरा छाया है।।14।।

गैवीनाथ मिश्रा शाहपुर
रीवा
9200981625




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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (2)

+

Lekhram Yadav said

नारी शक्ति की व्याख्या करती एक बहुत खूबसूरत रचना आपको सादर नमस्कार।

गैवीनाथ मिश्र replied

नारी का सम्मान हमारे लिए सर्वोपरि है।
धन्यवाद!

रीना कुमारी प्रजापत said

Waah sir ji kya khubsurat likha aapne bahut badhiya... Swagat hai aapka humare likhantu pariwar mein🙏💐

गैवीनाथ मिश्र replied

धन्यवाद!

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