" लिखना क्यों है"
लिखना क्यों है—
यह सवाल जब मन में आता है,
काग़ज़ का हर पन्ना
एक नया रास्ता दिखाता है।
यह सिर्फ़ कोरे पन्नों पर
स्याही बिखेरना नहीं,
यह तो टूटते हुए लम्हों को
समेटना और संवारना है।
जो बातें लफ़्ज़ों से
कभी बयाँ नहीं हो पातीं,
वो ख़ामोशियाँ बनकर
स्याही में ढल आतीं।
दिल के गहरे ज़ख़्मों को
यह चुपचाप मरहम देता है,
लिखना बेज़ुबान एहसासों को
एक नया नाम देता है।
भीड़ में खोई आवाज़ों को
पहचान दिलाने को,
सोए हुए इस जग को
फिर से जगाने को।
अपने अंदर उठते तूफ़ानों को
शांत कराने को,
और ख़ुद से ख़ुद की
एक सच्ची मुलाक़ात कराने को।
जब उम्मीदें टूटने लगें
और अँधेरा घना होने लगे,
जब अपने ही साए भी
अनजाने से लगने लगें,
तब कलम ही तो हाथ थामकर
राह दिखाती है,
भटके हुए मुसाफ़िर को
मंज़िल के क़रीब लाती है।
यह इतिहास के पन्नों में
सच को दर्ज करने की ज़िद है,
हर उस दर्द को आवाज़ देने की
एक पाक उम्मीद है।
जहाँ शब्द भी अक्सर
अपने घुटने टेक दिया करते हैं,
वहाँ लिखे हुए हर्फ़
अपना परचम लहराते हैं।
यह सिर्फ़ शब्दों की बुनावट नहीं,
आत्मा का संगीत है,
लिखना ही तो मानव-चेतना की
सबसे सुंदर रीत है।
जब तक साँसों की डोरी में
यह जीवन जारी रहेगा,
लिखने का यह पवित्र सफ़र
हर दिल को रूहानी रखेगा।
रचनाकार- पल्लवी श्रीवास्तव
ममरखा, अरेराज, पूर्वी चम्पारण (बिहार)


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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