मुझे खुशी की कविता के लिए
मगर कुछ शब्द कहो..
बोल कर न कह सको तो
संकेत से कहो,
चाहो तो नि:शब्द कहो..
मगर कुछ शब्द कहो..
अपने हृदय सरोवर में
कुछ चिर–स्थाई से कमल
पल्लवित करो,
इसको चाहो तो तुम
प्रारब्ध कहो..
मगर कुछ शब्द कहो..
प्रेम की हाट पर कोई
गाहक दृष्टिगोचर नहीं,
आए तो उससे
मोलभाव में उलझे
मन की पीड़ा निस्तब्ध कहो..
मगर कुछ शब्द कहो..
दिनकर की तीव्र रश्मियों
से तिलमिलाते मन को
किस विटप छांव में
विश्राम कराऊँ,
आखिर इस मरुभूमि में
क्यूं नहीं हरा पल्लव
उपलब्ध कहो,
मगर कुछ शब्द कहो..
पवन कुमार "क्षितिज"


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







