सबके कान्हा ❤️
आपकी मुस्कुराहट में ऐसा अपनापन है
कि सुख तो क्या हम दुख भी भूल जाते हैं 😊
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आज दर्शन करते हुए ऐसा लगा कि ठाकुर जी मुस्कुरा रहे हैं
तब से उलझन में हैं कि यह प्रेम भाव हमारा है या कृपा ठाकुर जी की!!
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भक्ति हो तो ऐसी हो ,
जो सबको अपने रंग में रंग ले 😊
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प्रभु हमारा हाथ थामे रखना ,
मोह-माया से ऐसे बाँधती है ये नगरी आपकी,
कि क्षण-भर में ही कब भटक जाए नियत हमारी !!
वन्दना सूद
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







