Newहैशटैग ज़िन्दगी पुस्तक के बारे में updates यहाँ से जानें।


Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat


Show your love with any amount — Keep Likhantu.com free, ad-free, and community-driven.

Show your love with any amount — Keep Likhantu.com free, ad-free, and community-driven.



The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

Newहैशटैग ज़िन्दगी पुस्तक के बारे में updates यहाँ से जानें।

Newसभी पाठकों एवं रचनाकारों से विनम्र निवेदन है कि बागी बानी यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करते हुए
उनके बेबाक एवं शानदार गानों को अवश्य सुनें - आपको पसंद आएं तो लाइक,शेयर एवं कमेंट करें Channel Link यहाँ है

The Flower of Word by Vedvyas MishraThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

इंतजार का पल - सुप्रिया साहू

एक कहानी सुनाऊं....चलो आज एक कहानी सुनाती हूँ।
गुरुवार का दिन बहुत ही खास दिन था। मन सुबह थोड़ा परेशान था पर कुछ समय बाद ठीक हो गया। तारीख१६ थी। उस खास दिन मेरे कुछ दोस्त आने वाले थे। वो बस बोल रहे थे आयेंगे करके पर उन लोगों ने तय नहीं किया था आज ही आयेंगे। मेरी बात मेरे दोस्त से हुआ था। उसने कहा कि आज आ सकते हैं इतना बोले और चलें गये। जब उन लोगों का मेरे पास आना तय हुआ उन्होंने मुझे नहीं बताया कि हम आ रहे हैं। बस कुछ ही दूरी बची थी मेरे घर आने के लिए तब उनका मैसेज आया। और कहा खाना बनाके रखो हम आ रहे हैं। मैंने पूछा-सच में आ रहे हो या मज़ाक कर रहे हो। उन्होंने फिर कहा नहीं..हम नहीं आ रहे हैं।फिर मैंने उन्हें फोन किया मोबाइल की घंटी बजी और उन्होंने फोन उठाया फिर मैंने पूछा आ रहे हो या नहीं तब बोले कि आ रहे हैं। सुनके सांसे थम सी गई। थोड़ा घबराई और हड़बड़ाहट में काम करने लगी। वो लोग मेरे घर और मेरे पास पहली बार आ रहे थे। वो जितना नज़दीक आते गए मेरी दिल की धड़कने तेजी से बढ़ने लगी, हाथ-पैर कांपने लगे। बाकी का रास्ता उन लोगों ने खुद तय किया थोड़ा सा बचा हुआ रास्ता जो मेरे घर तक आती है उसको मैंने बताया। जैसे ही वो घर पहुंचे मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि मेरे सामने हैं, मुझे देख रहे है और मैं उन्हें। घर के अंदर आए और हाथ मिलाए मुझसे और गले से लगाए। उसमें से एक शख्स था जिससे मैं हाथ नहीं मिलाई थी पर उसके साथ में जो आए थे उन्होंने कहा हाथ तो मिलाओ यार...। फिर मैं उससे हाथ मिलाई। मन तो उसे भी गले लगाने का था पर हाथ मिलाई। अगर कोई बहुत इंतजार के बाद मिले तो सिर्फ हाथ मिलाके काम चलाना बहुत मुश्किल होता है। पर मैंने उससे हाथ मिलाके काम चलाए। उसके बाद उनको चाय पिलाई, खाना खिलाई, घर घुमाई और छोटे से गार्डन में भी घुमाया। थोड़ा सा वक्त था पर यादें बहुत सारी समेट लिए थे। कोई अपना हो और उसे हम छू भी न पाए तब तो बुरा लगता ही है। बस उस पल को याद करती हूँ और मन ही मन मुस्कुराती रहती हूँ। काश ऐसा दिन एक बार और आए और मैं उससे मिलूं इस बार हाथ नहीं गले से लगाऊं....।।

- सुप्रिया साहू




समीक्षा छोड़ने के लिए कृपया पहले रजिस्टर या लॉगिन करें

रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (2)

+

रीना कुमारी प्रजापत said

Waah bahut khoob sach kaha aapne koi apna ho or use chhu bhi na paaye to bura lgta hi hai.... Zarur aayega wo din or hum khte hai is baar gale laga hi lijiyega.... Bahut hi pyari rachna

सुप्रिया साहू replied

Ab aap kah rhi hain to wo din jarur aayega aur is baar wo din aaya to hath nahi sidhe gale se lagaungi, bahut bahut aabhaar ewam dhanyawad didu 🥰❤️🫣, aapko sadar pranam 🙏🙏.

सरिता पाठक said

बहुत सुन्दर, कोई अपना हो उसे हम छू भी ना पाए बहुत बुरा लगता है ईश्वर करे वो जल्दी आएं और आपका अरमान पूरा हो सुप्रिया मेम को सादर नमस्कार 🙏

सुप्रिया साहू replied

आपने कह दिया अब वो दिन जरूर आएगा और अरमान भी पूरा हो जाएगा, इतनी प्यारी समीक्षा के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद सरिता मैम 🥰, आपको सादर प्रणाम 🙏🙏।

वास्तविक रचनायें श्रेणी में अन्य रचनाऐं




लिखन्तु डॉट कॉम देगा आपको और आपकी रचनाओं को एक नया मुकाम - आप कविता, ग़ज़ल, शायरी, श्लोक, संस्कृत गीत, वास्तविक कहानियां, काल्पनिक कहानियां, कॉमिक्स, हाइकू कविता इत्यादि को हिंदी, संस्कृत, बांग्ला, उर्दू, इंग्लिश, सिंधी या अन्य किसी भाषा में भी likhantuofficial@gmail.com पर भेज सकते हैं।


लिखते रहिये, पढ़ते रहिये - लिखन्तु डॉट कॉम


LIKHANTU DOT COM © 2017 - 2026 लिखन्तु डॉट कॉम
Designed, Developed, Maintained & Powered By HTTPS://LETSWRITE.IN
Verified by:
Verified by Scam Adviser
   
Support Our Investors ABOUT US Feedback & Business रचना भेजें रजिस्टर लॉगिन