शांति नहीं यहाँ—
सिर्फ सुकून की महफिल है।
मंदिर के बीच—
तालाब की ठंडी छांव है।
हर रोज़ की रौशनी में—
जब जल छूता किनारा,
मन को मिलता है—
एक अलग सा नज़ारा।
बगल से आती—
पानिपुरी की महक,
पुराने मंदिरों की—
रहस्य और जादू की झलक।
हर शनिवार—
खिचड़ी का स्वाद याद दिलाए,
कहीं और नहीं—
ऐसा तालाब, जो शहर से दिल मिलाए।
सालों से इंसान—
रोज़ यहाँ आता है,
हर बार देख—
हर बार सुकून पाता है।
तालाब की ठंडी लहरें,
मंदिर की शांति की परतें।
ये नज़ारा हर दिल को भाए,
हर आंख को सुकून से समाए।
—Gitanjali Gavel


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







