देखूं जो पल भर तो आग लगती हो
सावन की पहली बरसात लगती हो
लबों पे हंसी और निगाहों में नूर
हर एक अदाओं में करामात लगती हो
चांद भी तुमसे शरमा के छिप जाए
रातों की तुम वो सौगात लगती हो
खुशबू तुम्हारी हवा में घुली है
गांव की गलियों की तुम याद लगती हो
दिल में उतर जाओ दुआ बनकर
तुम किस्मत की कोई बात लगती हो
जो भी देखे एक पल ठहर जाए
हरी साड़ी में तुम बाग लगती हो


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







