(बाल कविता)
बिखरे बाल बनाता कंघा
__________________
सबका साथ निभाता कंघा ।
बिखरे बाल बनाता कंघा ।।
नाई की भी मदद करा दे
कुत्तों के भी बाल बना दे
सबकी सेवा करने वाला
कभी नहीं अलसाता कंघा ।
बिखरे बाल बनाता कंघा ।।
मिट्टी-धूल अश्व की झाड़े
बिल्ली के भी बाल संवारे
छोटे-बड़े दांत से अपने
पूरा सर सहलाता कंघा ।
बिखरे बाल बनाता कंघा ।।
घने और वीरर दांतों के
अति महीन सुंदर पांतों के
लीख जुएं पड़ जाते हैं तो
झटपट मार भगाता कंघा ।
बिखरे बाल बनाता कंघा ।।
चूहों जैसी पूंछों वाला
नए नए रंग रूपों वाला
लाल गुलाबी नीले पीले
कई रंग में आता कंघा ।
बिखरे बाल बनाता कंघा ।।
______
~राम नरेश उज्ज्वल


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







