संवारती जीवन श्यामल धरा हमारी,
फूलों सी खुशबू मेरे देश की माटी में।
गिरी कंदराएं और गंगाजल पुकारती,
सुधा सम अमृत मेरे देश की माटी में।
संवारती जीवन श्यामल धरा हमारी,
फूलों सी खुशबू मेरे देश की माटी में।।१।।
जब जब इस मिट्टी ने अंगड़ाई ली है,
सोना उबजकर महिमा मंडित की है।
साक्षी हमारा ये व्योम मंडल के तारे,
अग्रिम पथ हमारा कहते नए सितारे।
संवारती जीवन श्यामल धरा हमारी,
फूलों सी खुशबू मेरे देश की माटी में।।२।।
अद्भुत चमक दमक इस अवनि पर,
नव कोमल कुसुम लताएं भरे पड़े हैं।
विविध वन उपवन में पुष्प रंग बिरंगे,
कोयल कलरव सी मधुर तान उड़े हैं।
संवारती जीवन श्यामल धरा हमारी,
फूलों सी खुशबू मेरे देश की माटी में।।३।।
इस मिट्टी के कण - कण नया सवेरा,
क्षितिज हरी भरी है नभ नीला नीला।
पवन पावन बहती मन्द मन्द यहाँ से,
निर्झर निर्झर बहती नदियां ये नाला।
संवारती जीवन श्यामल धरा हमारी,
फूलों सी खुशबू मेरे देश की माटी में।।४।।
__ देवनन्दन कुमार, "बरहथिया"।
पता:_ ग्राम बरहत्था, डाकघर श्रीपुर,
किशनपुर, सुपौल, बिहार। पत्नी: रंजन राजहंस, माता: संझा देवी, पिता: कारी प्रसाद यादव। दिनांक _०५/०८/२०२६.


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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