आज अफसाना लिखने मैं फिर आया हूँ;
अपने दिल की बातें बताने आज आया हूँ।
बहुत नमस्कार, मिला है जो बहुत प्यार;
आपसे मिलने को था, बहुत मैं बेकरार।।
आज फुर्सत में हूँ, सोचा याद करता हूँ;
यूं ही जमाना बीत जाएगा, सोचता हूँ।।
रब्ब की दुआ रहे तो रोज रोज मिलूंगा;
दुःख सुख की सब बातें मैं खूब कहूंगा।।
किसको फुर्सत है भला, अरे ! इस दौर में;
मिलती जिन्दगी घिस जाती है इंदौर में।।
लेकिन नहीं यार, अफसाने बनते रहते;
आज जी भर भरके खुले दिल से बोलते।।
जी आज उपस्थित हूँ कविता कोश में;
मुझे भूल न जाना यार मेरे तूं आगोश में।।
__ देवनन्दन कुमार बरहथिया


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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