(बाल कविता)
दस रसगुल्ले
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बहुत दिनों पर आए मामा ।
रसगुल्ले दस लाए मामा।।
काले-काले बड़े निराले ।
सबके मन को भाने वाले ।।
डब्बा रसगुल्ले का खोला ।
मेरा जी भी डगमग डोला ।।
पर मामा पहले ललचाए ।
दो रसगुल्ले झटपट खाए ।।
शेष आठ मम्मी ने पकड़े।
साड़ी के पल्लू में जकड़े ।।
खुशबू पाकर दादा आए ।
दो रसगुल्ले फौरन खाए ।।
छः रसगुल्ले अब थे बाकी ।
तभी आ गईं झुमकी काकी ।।
मन उनका भी जब ललचाया ।
एक माँग कर झट से खाया ।।
रसगुल्ले अब पाँच बचे थे ।
जाने किसके नाम लिखे थे ।।
तभी अचानक मुनिया जागी ।
दो रसगुल्ले लेकर भागी ।।
मैंने कहा मुझे अब लाओ ।
रसगुल्ले का स्वाद चखाओ ।।
मम्मी बोलीं मत ललचाओ ।
तीन बचे, थोड़ा ग़म खाओ ।।
उसी समय चाचा जी आए ।
दो रसगुल्ले फट से खाए ।।
अब मेरा जी धक से बोला ।
मैने अपना मुँह तब खोला ।।
एक बचा जो लाओ मम्मी ।
मत ऐसे तरसाओ मम्मी ।।
मम्मी ने फिर मुझे थमाया ।
मन फूला अब नहीं समाया ।।
रसगुल्ले को मैंने चूमा ।
पाँच मिनट खुश हो कर झूमा ।।
रसगुल्ले पर जीभ लगाया ।
फिर खाने को मुँह फैलाया ।।
तभी झपट कर भागा बंदर ।
एक पेड़ पर बैठा चढ़ कर ।।
दौड़ पड़ा मैं उसके पीछे ।
पहुँचा उसी पेड़ के नीचे ।।
मै भी चढ़ने लगा पेड़ पर ।
उसने देखा मुझे घूम कर ।।
रसगुल्ला जब उसने खाया ।
दिखा-दिखा कर मुझे चिढ़ाया।।
लेकिन मैं कुछ कर न पाया ।
मन मसोस कर बस ललचाया ।।
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~राम नरेश 'उज्ज्वल'
देखिए कैसी है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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