(बाल कविता)
सूरत सही दिखाता दर्पण
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सच क्या है बतलाता दर्पण ।
सूरत सही दिखाता दर्पण ।।
अपने बाल खींचता नंदू
स्टाइल में रहता चंदू
गोरा काला जैसा होता
वैसा मुख दिखलाता दर्पण ।
सूरत सही दिखाता दर्पण ।।
रोग दोख हर दाग दिखाता
जैसा जिसका राग दिखाता
दिखलाता है केवल चेहरा
मन को नहीं दिखाता दर्पण ।
सूरत सही दिखाता दर्पण ।।
ऊंच,-नीच का भेद न जाने
छोटे बड़े सभी को माने
स्त्री पुरुष भिखारी राजा
सबको ही अपनाता दर्पण ।
सूरत सही दिखाता दर्पण ।।
जो भी इसके सम्मुख आता
उसका सच्चा रूप दिखाता
असली को नकली, नकली को
असली नहीं बताता दर्पण ।
सूरत सही दिखाता दर्पण ।।
रानी का भी रूप संवारे
राजा की पोशाक सुधारे
बहुत कीमती होता है पर
कभी नहीं इतराता दर्पण ।
सूरत सही दिखाता दर्पण ।।
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√राम नरेश 'उज्ज्वल'


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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