श्रेष्ठजन सब बैठे हुए
पति भी समक्ष थे
सभा में उपस्थित
बड़े-बड़े दिग्गजों के
होंठ क्यों? मौन थे
आवाज लगा रही थी द्रौपदी जी
आंखें सबकी झुकी हुई
भरी सभा में नारी क्यों?
विवशता की आंसू रोती रही
भीष्म पितामह जी जैसे यशस्वी
पांच पांडव जैसे महाबलशाली पति
हे कृष्ण हे कृष्ण की गुहार क्यों?
लगा रही थी द्रौपदी जी
बीच सभा में चीर हरण की पीड़ा
नारी एक सहती रही
पांव आपके आगे न बढ़े
बताओ आप सब कौन?थे
विदुर जी जैसे नितिज्ञ,उपस्थित
आचार्य द्रोणाचार्य,कृपाचार्य जैसे
महाज्ञानी
याचना की भीख क्यों?
मांग रही एक नारी
ना राम आएंगे बचाने
ना श्याम आएंगे बचाने
आज की द्रौपदी
तू खुद ही अपना चीर हरण बचा ले
राम राम चिल्लाएगी
हे कृष्ण कृष्ण गुहार लगाएगी
यह दुनिया मौन है
मौन ही रह जाएगी
घोर कलयुग है
कोई नहीं आएगा बचाने
आज की द्रौपदी
खुद अपना सम्मान बचा ले
बरसों से होता आया यही
हर युग में यही होगा
नारी को नीचा दिखाने का
नहीं छोड़ा जाता कोई मौका
नहीं आते भगवान श्री कृष्ण जी
द्रौपदी जी भरी सभा में
अपमानित होती रहतीं
अपना से लेकर पराया तक
बैठी दुनिया तमाशा देखती रहती
पति को परमेश्वर मान
हर युग में नारी ने पूजा
नारी की रक्षा के लिए
प्रकट होता है कोई दूजा
वन गई सीता माता जी को
महर्षि वाल्मीकि जी ने आश्रय दिया
चीरहरण की महात्रासदी से
श्री कृष्ण जी ने बचा लिया
ना अपना आएगा बचाने
ना पराया आएगा बचाने
आज की द्रौपदी खुद
अपना स्वाभिमान बचा ले।।
2 अप्रैल 2026 को
अमर उजाला में प्रकाशित रचना
-ममता तिवारी


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







