ज़िन्दगी अज़ीयत में हों तों लम्हें याद रहते हैं
जैसे कई दफ़ा मर कर भी मुर्दे बर्बाद रहते हैं
लोग कहते है कि वक़्त हर ज़ख्म भर देता हैं
पऱ कुछ ज़ख्म हैं जो हर वक़्त आबाद रहते हैं
ऐ बुलबुल ज़रा इश्क़ में एहतियात रखना तुम
यहाँ गुल की सूरत में छुपे कई सैयाद रहते हैं
ख़ामखा मानक बना दिए नैन-नक्श के यूँही
अच्छी सूरत वाले शख्श कहाँ नौशाद रहते है
औरत ज़ात क़ो कुछ याद हों न हों पऱ मग़र
अग़र कोई ज़रा सी इज़्ज़त दे तों याद रहते हैं
हर बात मान लेते हैं ख़ामोशी ओढ़े हुए कृष्णा
हम जैसे तों इन ज़िंदा लोगो में अपवाद रहते है...
-कृष्णा शर्मा


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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