मैं किसी को चाहती हूं ,
उस मोर पंख को ,
जो उसकी पाग पर सजा है ।
मैं किसी को चाहती हूं,
जिसकी चरण-रज ,
माथे पर सजाकर ,
पूरा जीवन जी सकती हूं ।
मैं किसी को चाहती हूं ,
जो पीतांबर पहने ,
बंसी लिए,
मेरे सम्मुख बैठा है ।
मैं किसी को चाहती हूं,
जो दुर्लभ कमल-नयन लिए,
मुझे निहार रहा है ।
मैं किसी को चाहती हूं ,
पर जब यह पर्दा हटा ,
तब अंतस में एक प्रश्न उठा ,
क्या मैं खुद को चाहती हूं...।।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







