जो कहना है कह दूँगा मैं,
जो करना है कर जाऊँगा,
आँधी चाहे लाख उठे,
हर तूफ़ाँ से टकराऊँगा।
मैं मिट्टी का छोटा दीपक,
लेकिन इतना जानता हूँ,
जब तक साँसें बाकी हैं —
हर रात में जल जाऊँगा।
दीया हूँ मैं, जलता रहूँगा,
अँधेरों से लड़ता रहूँगा।
गिर-गिरकर फिर उठता रहूँगा,
अपने पथ पर चलता रहूँगा।
राहों में चाहे काँटे हों,
या पाँवों में छाले हों,
सपनों की खातिर निकला हूँ,
दर्द दर्द भी प्यारे हों।
मैंने तो बस इतना सीखा —
रुक जाना मौत बराबर है,
जीवन का असली अर्थ वही,
जो संघर्षों के अंदर है।
पत्थर दिल इस दुनिया में भी,
मैं गीत नए गाऊँगा,
सूखी धरती की साँसों में,
बारिश बनकर आऊँगा।
दीया हूँ मैं, जलता रहूँगा,
अँधेरों से लड़ता रहूँगा।
गिर-गिरकर फिर उठता रहूँगा,
अपने पथ पर चलता रहूँगा।
कितनी ही बार गिराया है,
हालातों की ठोकर ने,
लेकिन हर बार उठाया है,
भीतर बैठे ईश्वर ने।
आँखों में जो सपना है,
उसको सच कर जाना है,
अपने हिस्से की मिट्टी से,
इतिहास नया बनाना है।
मैं हार नहीं मानूँगा अब,
ये मन ने आज ठाना है,
जो कल तक सिर्फ़ कहानी था,
उसको सच दिखलाना है।
दीया हूँ मैं, जलता रहूँगा,
अँधेरों से लड़ता रहूँगा।
गिर-गिरकर फिर उठता रहूँगा,
अपने पथ पर चलता रहूँगा।
न सोचा क्या मिल पाएगा,
न गिनता हूँ नुकसान यहाँ,
बस कर्मों की पूजा करता,
बाकी सब भगवान यहाँ।
मैं अपने पथ का राही हूँ,
मंज़िल खुद बन जाऊँगा,
साथ न दे ये दुनिया तो,
तन्हा ही बढ़ जाऊँगा।
दीया हूँ मैं, जलता रहूँगा,
अँधेरों से लड़ता रहूँगा।
गिर-गिरकर फिर उठता रहूँगा,
अपने पथ पर चलता रहूँगा।
कल सूरज फिर निकलेगा,
ये रात गुजर ही जाएगी,
हर बुझती हुई उम्मीद यहाँ
फिर से सँवर ही जाएगी।
तू हिम्मत मत हार मुसाफ़िर,
ये वक्त बदल भी सकता है,
जिसने खुद पर विश्वास रखा,
वह किस्मत लिख भी सकता है।
जो कहना है कह दूँगा मैं,
जो करना है कर जाऊँगा,
सच की राहों पर चलकर मैं,
दुनिया से लड़ जाऊँगा।
दीया हूँ मैं, जलता रहूँगा,
अँधेरों से लड़ता रहूँगा।
जब तक साँसें बाकी हैं —
मैं जग में यूँ जलता रहूँगा।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







