विदित है फूलों का
जन्म है तीन दिनों का
पर निकलना बंद नहीं किया
विदित है इंसान का
जन्म है सौ सालों का
पर कोशिश क्यों बंद करने लगे ?
विदित है फूलों का
कली से फूल का सफर
भी संघर्ष से परे है
विदित है इंसान का
हार से जीत का सफर
तो कष्टों को रुकावट क्यों समझने लगे ?
विदित है फूलों का
तीन दिन की दीवाली है
फिर भी महकना न भूला
विदित है इंसान का
साँस रहने तक का है
तो श्रमजल बहाना क्यों भूल गए ?


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







