दिल में बसी है
आज भी वो बातें
कैसे हमने जलते दीप
गंगा में प्रवाहित कर
एक दूसरे को देख
मुस्कुरा कर
अपनी-अपनी ऊंगली
क्रॉस कर
निवेदन किया था कि
आगे लड़खड़ाए न कहीं
बुझ जाए न कहीं
क्यूंकि चाहत थी
सुदूर जाकर प्रेम की
ज्योत जगमगाए कहीं

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
दिल में बसी है
आज भी वो बातें
कैसे हमने जलते दीप
गंगा में प्रवाहित कर
एक दूसरे को देख
मुस्कुरा कर
अपनी-अपनी ऊंगली
क्रॉस कर
निवेदन किया था कि
आगे लड़खड़ाए न कहीं
बुझ जाए न कहीं
क्यूंकि चाहत थी
सुदूर जाकर प्रेम की
ज्योत जगमगाए कहीं
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