विदाई के बाद पति के साथ सुकून आया।
बेहद चिपक कर बैठी अन्दर अमन आया।।
जरा भी वो न डिगा इतना कंट्रोल खुद पर।
मैं खुशी से फूली ना समाई क्या पति पाया।।
एक रात गुजारी दूसरी खुद-ब-खुद गुजरी।
मेरा इंतजार उसका लेपटॉप समझ न आया।।
तब तक पुरुष की उलझनों से वाकिफ न थी।
मर्दाना कमजोरी न कभी सुना न समझ पाया।।
व्यथित मन तरह-तरह की चिंताएँ 'उपदेश'।
किससे कहूँ कैसे कहूँ मन उथल-पुथल पाया।।
मेरी चिंता से ज्यादा इज़्ज़त घर परिवार की।
इलाज की राह सुझाकर पति का भरोसा पाया।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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