सुना था—
इंजीनियर बड़े जुगाड़ू होते हैं,
कम साधन में भी
बड़े-बड़े पुल खड़े कर देते हैं।
फिर तुम मिले,
तो पता चला—
कुछ इंजीनियर
रिश्तों में भी जुगाड़ फिट कर देते हैं।
जहाँ प्रेम चाहिए था,
वहाँ सुविधा लगा दी,
जहाँ संवाद चाहिए था,
वहाँ चुप्पी की दीवार उठा दी।
जिम्मेदारी का लोड आया,
तो बहानों का सपोर्ट दे दिया,
गलती की नींव हिली,
तो इल्ज़ामों का सीमेंट भर दिया।
वफ़ादारी की ड्रॉइंग में
कई संशोधन कर डाले,
ज़रूरत के हिसाब से
रिश्ते के नियम बदल डाले।
दिल की दरारें बढ़ती रहीं,
साहब कहते रहे—
“स्ट्रक्चर अभी सुरक्षित है।”
मैं रोती रही,
और तुम समझाते रहे—
“इतना तो हर रिश्ते में
सेटलमेंट होता है।”
मैं भी इंजीनियर थी,
इसलिए देर से सही,
पर समझ गई—
हर दरार
प्लास्टर से नहीं छिपती,
हर रिश्ता
रेट्रोफिटिंग से नहीं बचता।
कुछ इमारतें इसलिए गिरती हैं
क्योंकि नींव कमज़ोर होती है,
और कुछ रिश्ते इसलिए—
क्योंकि एक इंसान
उन्हें घर समझकर बनाता रहता है,
और दूसरा
हर बार अपना मतलब निकालने के लिए
नया जुगाड़ लगाता रहता है।
आख़िर में तुम जीत गए—
रिश्ता भी बचाए रखा,
ज़िम्मेदारी भी नहीं निभाई।
सच में…
सुना था इंजीनियर जुगाड़ू होते हैं,
तुमने तो प्रेम को भी
“वर्किंग कंडीशन” में रखकर
ज़िंदगी से बाहर कर दिया।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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