न मैं राँझा, न मैं फरहाद, न ही मैं मजनूँ हूँ,
ख़ुद ही को ख़ुद में तलाशता एक जुगनूँ हूँ।
बीती होगी उम्र उनकी माशूका की यादों में,
हकीकत में अपना वजूद बनाने का जुनूँ हूँ।
🖊️सुभाष कुमार यादव

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
न मैं राँझा, न मैं फरहाद, न ही मैं मजनूँ हूँ,
ख़ुद ही को ख़ुद में तलाशता एक जुगनूँ हूँ।
बीती होगी उम्र उनकी माशूका की यादों में,
हकीकत में अपना वजूद बनाने का जुनूँ हूँ।
🖊️सुभाष कुमार यादव
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