उसका जूठा पानी अमृत बाकी दरिया खारे हैं
वो चाहे तों ठोकर मारे,हम तों सबकुछ हारे हैं
वो ओस की बूँद सा हैं बिल्कुल पाक-साफ़
एक मैं हूँ जिसमे भरे ऐब-ओ-नुक्स सारे हैं
ना उनके रूबरू हुए ना लम्स महसूस किया
एक हमारे ही नसीब में सारे के सारे खसारे हैं
ना उसकी गली सें गुज़र सके ना दर मिला
कैसे अभागे निकले पैरो तले सिर्फ अंगारे हैं
सबसे मुस्कुराकर मिलता हैं गले सें लगाता हैं
हमारे नसीब में परछाई तक नहीं कैसे बेचारे हैं
इश्क़ भले अधूरा हों पऱ ज़ज़्बात मुक़म्मल हैं
हमारे दरमियाँ ज़ात उम्र की अनगिनत दरारे हैं
सिर्फ एक दफ़ा छूना हैं उसे महसूस करना हैं
कुछ बंदीशे हैं ज़िस्म पऱ रवायते पैर पसारे हैं
न पा सके न छू सके न उसका लम्स महसूस हों
कृष्णा इश्क़ के रिवाज़ भी सारे जहाँ सें न्यारे हैं..
-कृष्णा शर्मा


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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