उस दिन की बरसात
भूल गई तू, मैं ना भूला,
वह बारिश की रात।
खिड़की से तू झाँक रही थी,
हो रही थी बरसात॥
बादल घिरकर छाए नभ में,
बिजली थी मुसकाई।
भीगी-सी तू देख रही थी,
सकुचाई-शर्माई।
एक नज़र ने कह डाली थी
मन से मन की बात—
भूल गई तू, मैं न भूला,
वह बारिश की रात॥
भीगी राह, महकती माटी,
झूम रहे थे पात।
सहमी-सी तू पोंछ रही थी,
भीगे अपने गात।
आज वही फिर सावन आया,
मचल उठे जज़्बात—
भूल गई तू, मैं न भूला,
वह बारिश की रात॥
सूनी रातें, ठंडी आहें,
यादों की परछाई।
बूँदों की हर एक थाप ने,
दिल में कसक जगाई।
सिमट गई मन में आकर,
यादों की बरसात—
भूल गई तू, मैं न भूला,
वह बारिश की रात॥
खिड़की अब भी वैसी ही है,
वैसा ही है आँगन।
बस तू नहीं, तुम्हारी यादें,
उलझी हैं मन-दामन।
बीत गए कितने ही सावन,
कितने नव प्रभात—
भूल गई तू, मैं न भूला,
वह बारिश की रात॥
कितने चेहरे दिखते नित दिन,
कितने मौसम आए।
छवि तुम्हारी बसी हृदय में,
मन से मिट न पाए।
कितने सावन बीत गए हैं,
दे-देकर आघात—
भूल गई तू, मैं न भूला,
उस दिन की बरसात॥


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







