मुझको देखकर वो आईना निकलेगी।
तूँ-तू मैं-में के बाद भी रास्ता निकलेगी।।
रहम दिल के सामने खामोशी ही भली।
जुबाँ से कुछ निकलकर आँसू निकलेगी।।
ये खामोशी का मतलब इज़्ज़त उसकी।
दिल में रखने वाली दिल से न निकलेगी।।
दुनिया कुछ भी बोले कान सुनते ही नही।
फासला कम करने को भला ही निकलेगी।।
नुकसानदेह दुश्मनी उसको पता 'उपदेश'।
पुराने नुक़स छोड़कर नए नुक़स निकलेगी।।
मोहब्बत समझने की ताकत उसके पास।
निभाने की जुस्तजू मुझको क्या निकलेगी।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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